
“काकरोच जनता पार्टी” जैसे इंटरनेट मीम-समुदायों को केवल मज़ाक, आलस्य या “बिगड़ी हुई Gen Z” कहकर समझना अधूरा होगा। यह वास्तव में आधुनिक डिजिटल संस्कृति, पहचान संकट, मीम राजनीति, सामाजिक बेचैनी, और इंटरनेट-आधारित सामूहिक मानसिकता का मिश्रण है। इसे सीधे “कल्चरल मार्क्सवाद” कहना भी सरल निष्कर्ष होगा, लेकिन यह सच है कि जिन वैचारिक परिवर्तनों की चर्चा Gramsci, Frankfurt School, Critical Theory और बाद में identity politics में हुई, उनका कुछ प्रभाव आधुनिक इंटरनेट संस्कृति पर दिखाई देता है।
आज का युवा केवल आर्थिक दबाव में नहीं जी रहा, बल्कि सांस्कृतिक और मनोवैज्ञानिक दबावों में भी जी रहा है। पहले व्यक्ति की पहचान परिवार, धर्म, समुदाय, पेशा और स्थानीय समाज से बनती थी। अब identity memes, fandoms, aesthetics, online tribes, reels और temporary internet communities से बन रही है। इससे एक तरफ स्वतंत्रता मिली, लेकिन दूसरी तरफ स्थिरता टूट गई। इसी खालीपन में “कॉकरोच जनता पार्टी ” जैसी विरोधाभासी कम्युनिटीज पैदा होती हैं, जहाँ लोग खुद का मज़ाक बनाकर, अर्थहीन और सामाजिक प्रणाली के विरुद्ध meme के माध्यम से अपना अस्तित्व खोजते हैं।
कल्चरल मार्क्सवाद के आलोचक कहेंगे कि यह वही प्रक्रिया है जिसमें पारंपरिक संस्थाएँ — परिवार, धर्म, राष्ट्रवाद, सामाजिक अनुशासन — धीरे-धीरे कमजोर हुए और उनकी जगह identity-based discourse, victimhood narratives, performative activism और meme-politics ने ले ली। उनके अनुसार इंटरनेट culture लगातार society को “oppressor vs oppressed” के lens से देखने की आदत डालता है। इसलिए उन्हें लगता है कि Gen Z की यह “cooked secular”, hyper-online और permanently dissatisfied मानसिकता उसी सांस्कृतिक परिवर्तन का परिणाम है, जिसे वे सांस्कृतिक मार्क्सवाद कहते हैं।
लेकिन दूसरी ओर कई समाजशास्त्री और सांस्कृतिक चिंतक कहेंगे कि यह केवल मार्क्सवाद का प्रभाव नहीं, बल्कि late capitalism, algorithm-driven social media, consumerism और attention economy का परिणाम है। Instagram, TikTok, X, YouTube और meme pages लगातार ध्यान को खंडित करते हैं। व्यक्ति जहाँ सामाजिक रूप से सक्रिय भी बनना चाहता है वही कलात्मक और आकर्षक भी दिखना चाहता है, राजनैतिक रूप से जागरूक भी दिखना चाहता है और consumer trends भी follow करना चाहता है। यही कारण है कि आधुनिक इंटरनेट संस्कृति विरोधाभास दिखाई देता है — anti-capitalist memes भी viral होते हैं और उन्हीं memes के बीच luxury brands की reels भी चलती हैं।
“कॉकरोच जनता पार्टी ” जैसी ऑनलाइन कम्युनिटीज अक्सर सामाजिक विद्रोह का एस्थेटिक पैदा करती हैं, लेकिन उनका ये सामाजिक विद्रोह कई बार वास्तविक राजनीतिक संगठन नहीं होता, वह irony, sarcasm, self-deprecation और collective frustration पर आधारित होता है। वहाँ लोग “न घर के न घाट के ” वाली भावना में जीते हैं — traditional values से दूरी, लेकिन किसी स्थायी आइडियोलॉजिकल फ्रेमवर्क से भी जुड़ाव नहीं। यह स्थिति कई बार चिंता(व्यग्रता), अप्रासंगिक हो जाने का डर , एकाकीपन और स्वयं को तुलनात्मक रूप से देखने और समझने से पैदा होती है।
Gen Z का बड़ा हिस्सा politically overloaded भी है। वे लगातार social justice, cancel culture, gender debates, nationalism, secularism, climate anxiety, AI, career insecurity और social validation के बीच फँसे रहते हैं। इंटरनेट उन्हें हर समय बताता रहता है कि उन्हें morally correct भी होना है, aesthetically perfect भी दिखना है, socially aware भी होना है और successful भी। इससे मानसिक थकावट पैदा होती है। इसलिए कई meme communities “nothing matters” humour की तरफ चली जाती हैं।
अगर Raymond Williams की दृष्टि से देखें, तो यह केवल “culture का पतन” नहीं बल्कि एक वर्चस्व का संघर्ष भी है।आज भी समाज की मुख्य संस्कृति उपभोग और पूंजीवाद के प्रभाव में है, जिसके कारण समाज में एक उभरता हुआ डिजिटल कल्चर्स पैदा हो रहा हैं। Meme कम्युनिटीज उसी उभरते हुए सांस्कृतिक बदलाव का का हिस्सा हैं। वे कभी प्रतिरोध बनती हैं, कभी पलायनवादी, और कभी सिर्फ मनोरंजन।
एंटोनियो ग्रामस्की के कल्चरल हेगेमोनी कॉन्सेप्ट से देखें तो internet प्लेटफॉर्म्स आज नए सांस्कृतिक संस्थाएं बन चुके हैं। पहले आध्यात्मिकसंस्थाएं ,विद्यालय और समाचारपत्र समाज का समग्र विचार बनाते थे; आज एल्गोरिदम्स , इंफ़्लुएंसर्स और meme पेजेज समाज की चेतना को आकार देते हैं। इसलिए ऑनलाइन मीम कल्चर को केवल “टाइमपास ” मानना गलत होगा। यह वास्तव में नई सांस्कृतिक राजनीति का हिस्सा है।
फ़ाउकॉल्ट की भाषा में देखें तो शक्ति अब केवल सरकार में नहीं, बल्कि डिस्कोर्स , ट्रेंड्स , हैशटैग्स , मॉडरेशन सिस्टम्स और डिजिटल शेमिंग में भी मौजूद है। कैंसिल कल्चर और ऑनलाइन आक्रोश इसी पॉवर स्ट्रकचर के आधुनिक रूप हैं। वहीं जैकस डेररिडा और उत्तर आधुनिक विचारकों के अनुसार वर्तमान इंटरनेट कल्चरवास्तविक अर्थ को तोड़ देता है। व्यंगात्मकता इतनी अधिक हो जाती है कि व्यक्ति खुद भी नहीं जानता कि वह व्यंग कर रहा है, प्रोटेस्ट कर रहा है या सिर्फ ध्यान आकर्षित कर रहा है।
इसलिए “कॉकरोच जनता पार्टी ” को पूरी तरह कल्चरल मार्क्सवाद की तरह लेना बौद्धिक त्रुटि होगी , लेकिन यह जरूर कहा जा सकता है कि आधुनिक इंटरनेट कल्चर में आइडेंटिटी पॉलिटिक्स , प्रोग्रेसिव डिस्कोर्स , meme rebellion, उपभोक्तावादी पूँजीवाद ,अकेलापन, एल्गोरिथमिक इन्फ्लुएंस और सांस्कृतिक खंडन सब मिलकर एक हाइब्रिड डिजिटल कल्चर बना रहे हैं। उसी हाइब्रिड कल्चर का एक व्यंग्यात्मक , आत्मसचेत और अराजक रूप ऐसी कम्युनिटीज में दिखाई देता है।
अंततः यह केवल विचारधारा की कहानी नहीं, बल्कि आधुनिक युवाओ की मानसिकता की भी कहानी है। यह उस पीढ़ी की स्थिति है जो एक ही समय पर हाइपर -कनेक्टेड भी है और इमोशनली डिस्कनेक्टेड भी; पॉलिटिकली वोकल भी है और अस्तित्व का संघर्षरत भी, आक्रोशित भी दिखना चाहती है और स्वयं का अस्तित और अपनापन भी खोज रही है। यही विरोधाभास आधुनिक इंटरनेट संस्कृति की सबसे बड़ी पहचान बन चुका है।
डॉ समीक्षा नायक