भारत में दुर्घटना होने पर अब इलाज का अधिकार और मजबूत हुआ।

26 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला दिया। कोर्ट ने कहा—

अगर किसी व्यक्ति को दुर्घटना या गंभीर चोट लगती है, तो समय पर इलाज मिलना उसका अधिकार है।
यह अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) का हिस्सा है।

पहले समस्या क्या थी?
भारत में हर साल लाखों लोग सड़क दुर्घटना, गिरने, जलने जैसी घटनाओं में घायल होते हैं।
अक्सर समस्या यह होती थी कि समय पर एम्बुलेंस नहीं आती, लोग मदद करने से डरते हैं, अस्पताल पहुँचने में देर हो जाती है। इलाज शुरू होने में समय लग जाता है और इसी देरी के कारण कई जानें चली जाती हैं।

कोर्ट ने क्या कहा?

कोर्ट ने कहा –
“सिर्फ अस्पताल अच्छा होना काफी नहीं है, मरीज समय पर वहाँ पहुँचना भी जरूरी है।”
इसलिए इलाज की पूरी श्रृंखला मजबूत होनी चाहिए:

दुर्घटना होते ही मदद मिले

📞 तुरंत कॉल हो

एम्बुलेंस समय पर पहुँचे

सही अस्पताल तक मरीज पहुँचे

इलाज तुरंत शुरू हो।

सरकारों को क्या करना होगा?
कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश दिए—
सभी आपात नंबरों को 112 से जोड़ना

एम्बुलेंस में GPS लगाना

मदद करने वालों (Good
Samaritan) को सुरक्षा देना

अस्पतालों की ट्रॉमा सुविधा बेहतर करना

इलाज और प्रतिक्रिया समय की निगरानी करना
इसका आम लोगों के लिए क्या मतलब है?

अगर भविष्य में किसी को दुर्घटना होती है तो व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए कि—
“किस नंबर पर फोन करें?”
“एम्बुलेंस कब आएगी?”
“अस्पताल मिलेगा या नहीं?”
इन सवालों की चिंता कम हो और
समय पर इलाज मिले और जान बच सके।

एक पंक्ति में:
“अब केवल जीने का अधिकार नहीं, बल्कि दुर्घटना के बाद समय पर इलाज पाने का अधिकार भी और मजबूत हुआ है।”

उदित शंकर तिवारी


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