डीलिस्टिंग को लेकर धार में ऐतिहासिक महारैली-42 डिग्री तापमान में 20 हजार से अधिक जनजाति लोगों नें निकाली महारैली

धार की धरा से हुआ डिलिस्टिंग का शंखनाद

धर्मांतरित व्यक्तियों को जनजाति की सूची से बाहर करने की मांग को लेकर जिलेभर से हजारों की संख्या में जनजाति जुटे

42 डिसे तापमान में नृत्य करते हुए जिले भर के 20 हजार से लोग शामिल हुए

 धर्म परिवर्तन कर लेने के बाद  आरक्षण का लाभ नहीं देने पर हुए एक जुट धार।

24 अप्रैल 2022

 धार के डीलिस्टिंग को लेकर ऐतिहासिक महारैली का आयोजन किया गया। 42 डिग्री सेल्सियस के तापमान में आदिवासी अंचल के भाई-बहनों ने अपने अधिकार और धर्मांतरण को लेकर एकजुटता से यह रैली निकाली। इसमें 20 हजार से अधिक संख्या में लोग शामिल हुए। आंदोलन से जुड़े हुए पदाधिकारी और अंचल के आदिवासी नेता बड़ी संख्या में शामिल हुए। शहर के प्रमुख मार्गों पर महारैली के स्वागत के लिए समाज जनों एवं शहर वासियों ने विशेष इंतजाम किए गए थे। जगह-जगह पानी, शीतल पेय का इंतजाम किया गया था। आदिवासी वेशभूषा में सुमधुर संगीत के साथ इस महारैली में शामिल हुए। इसके माध्यम से डीलिस्टिंग विषय को बहुत बड़ी ताकत से रखा गया। साथ ही इस विषय पर समाज कितना गंभीर है, वह भी दर्शाया गया।

डीलिस्टिंग को लेकर एक बहुत बड़ा आंदोलन चल रहा है। डीलिस्टिंग से तात्पर्य है कि अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोग जिनका धर्म परिवर्तन कतिपय विधर्मी लोग लालच देकर या अन्य प्रलोभन से करते हैं। ऐसे लोग जो ईसाई या मुस्लिम धर्म अपना लेते हैं और फिर भी अनुसूचित जनजाति वर्ग के आरक्षण का लाभ लेते हैं। ऐसे लोगों को डीलिस्टिंग किया जाए इससे वे आरक्षण से दूर हो सके। साथ ही जो योग्य और अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोग हैं। उनके आरक्षण के हक का नुकसान नहीं हो। इसलिए यह एक बहुत बड़ा आंदोलन चलाया जा रहा है। इसी के चलते यह महा रैली निकाली गई। इसके पूर्व यहां मंचीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया था।

10% धर्मांतरित व्यक्तियों ने  80% आरक्षण व सुविधाओं का लाभ उठाया

मुख्य वक्ता  व जनजाति सुरक्षा मंच के राष्ट्रीय सह संयोजक डॉ. राजकिशोर हासदा ने डीलिस्टिंग के बारे में विस्तार से  कहा कि यह आंदोलन 50 वर्ष पूर्व डॉक्टर कार्तिक उरांव द्वारा चलाया गया था। जनजाति समाज से अपनी रीति रिवाज परंपराएं छोड़ चुके है।, ऐसे व्यक्तियों को जनजाति सूची से बाहर करना है। ऐसा कानून संसद में बनाने के लिए प्रयास किया गया। पंचायत से लेकर संसद तक इस अभियान को चलाया जाएगा। यह आंदोलन उन लोगों के खिलाफ है जो हमारी आस्था, परंपरा, रीति रिवाज, संस्कृति का त्याग कर चुके है। ऐसे लोगों ने हमारे आरक्षण का, हमारी सुविधाओं का लाभ उठाया है। आरक्षण का लाभ अब इन लोगों को नहीं लेने देगें। 10% धर्मांतरित व्यक्तियों ने  80% आरक्षण व सुविधाओं का लाभ उठाया है। जो वास्तव में जनजाति समाज का हक  था। ये 74 वर्षों से चल रहा है। अब नहीं चलेगा।

-इस मौके पर मुख्य वक्ता के रूप में मंच पर जनजाति सुरक्षा मंच के  राष्ट्रीय सह  संयोजक डा राजकिशोर हसदा विशेष रूप से मौजूद थे। मंच पर जनजाति सुरक्षा मंच के राष्ट्रीय संगठन मंत्री सूर्य नारायण सूरी ,मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ   संयोजक कालू सिंह मुजाल्दा प्रदेश संयोजक  कैलाश निनामा, तथा क्षेत्रीय अधिकारी प्रवीण ढोलके,तिलकराज दांगी  कैलाश अामलियार मौजूद थे। इस मौके पर वक्ता रामप्रकाश मच्छार ने कहा कि आज का समय अनुसूचित जनजाति के लोगों की रक्षा का समय है। सुरक्षा मंच का उद्देश्य है, वह पूरा करने के लिए हमें एकजुट होना पड़ेगा। श्रीमती शिवकुमारी बैनर सहित श्री पंडित कटारे, श्री डूंगर सिंह बघेल ने भी अपने विचार रखे। अतिथियों का स्वागत श्री अरविंद डावर, जयराम जी गावर, श्री राजू एम सोलंकी, श्री रणधीर अलावा, श्री महेंद्र मेरती, श्री कैलाश डावर ,श्री सुंदर चौहान,बलवन्त रावत एवं संचालन कपिल निनामा ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां शबरी के चित्र पर दीप प्रज्वलन और माल्यार्पण के साथ किया गया। श्री कैलाश झाबा और उनके दल ने नृत्य की प्रस्तुति दी।

नगर के प्रमुख मार्गों से महारैली निकली। जगह-जगह इसका स्वागत किया गया। पूरे शहर में भ्रमण के बाद यह रैली पुनः किला मैदान पहुंची। यहां इसका समापन हुआ इस महारैली के माध्यम से धर्मांतरण पर रोक लगाने के साथ-साथ जिनका धर्मांतरण हो चुका है और अपनी मूल संस्कृति को छोड़कर अनुसूचित जनजाति समुदाय के आरक्षण सहित अन्य सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं, उनके खिलाफ डीलिस्टिंग का यह आंदोलन जिले में हुआ है आभार  मंच के जिला संयोजक अरविंद डाबर ने किया 

 जिले भर से 200 से अधिक बसों तथा सेकड़ों वाहनों से लोग पहुंचे।

हजारों स्थानों से आदिवासी अंचल के भाइयों ,बहिनो ने लिय आयोजन में भाग

10 नृत्य दल शामिल हुए।

सांसद से लेकर पूर्व मंत्री और प्रमुख सभी कार्यकर्ताओं ने सहभागिता की।

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