ज्ञानेश्वरी हमें दुनिया को देखने और जीवन को समझने का ज्ञान देती है – सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत

Mohan Bhagwat launching Dnyanrang Dnyaneshwari App

मुंबई, 02 अक्तूबर। संत ज्ञानेश्वर महाराज के 750वें जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में ‘वैल्युएबल ग्रुप’ द्वारा प्रस्तुत और ‘मेराक इवेंट्स’ द्वारा आयोजित ‘ज्ञानरंग : माऊलींच्या ओव्यांचा उत्सव’ समारोह शुक्रवार को प्रभादेवी स्थित रवींद्र नाट्यमंदिर में संपन्न हुआ। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने ‘ज्ञानरंग : ज्ञानेश्वरी’ नामक विशेष मोबाइल ऐप का लोकार्पण किया।

सरसंघचालक जी ने कहा कि ज्ञानेश्वरी हमें दुनिया को देखने और जीवन को समझने का ज्ञान देती है। काल का संदर्भ बदल जाने पर भी यह ज्ञान और उससे उपजी संस्कृति बनी रहती है। ज्ञानेश्वरी कल, आज और कल भी मार्गदर्शक है। उन्होंने प्रत्येक व्यक्ति से ज्ञानेश्वरी के कम से कम एक श्लोक/पद का अनुभव करने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि दुनिया का जीवन शाश्वत है और दुनिया को किस तरह देखा जाए, जीवन को कैसे समझा जाए — यह ज्ञान हमें सिखाता है। यह ज्ञान हर जगह एक ही है। हर कालखंड में महापुरुषों ने इस ज्ञान को अपने काल के संदर्भ में प्रस्तुत किया। विदेशी आक्रमणों के काल में भक्ति के आधार पर भारतीय समाज टिका रहा और समृद्ध हुआ। आज विश्व का पथप्रदर्शन करने की जिम्मेदारी भारत की है। ज्ञानेश्वरी भारत की ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर है और इसे नई पीढ़ी तक तथा दुनिया भर के जिज्ञासुओं तक पहुँचाना आवश्यक है।

ऐप की विशेषताएं

आधुनिक माध्यमों से यह धरोहर नई पीढ़ी तक पहुँचे, इस भावना से ‘ज्ञानरंग : ज्ञानेश्वरी’ ऐप तैयार किया गया है। इसमें संत ज्ञानेश्वर के पद दैनिक जीवन में सुने, पढ़े और समझे जा सकेंगे — पद सुनते समय शब्दों को साथ-साथ पढ़ा भी जा सकेगा। ऐप गूगल प्ले स्टोर और ऐप्पल ऐप स्टोर पर सभी के लिए निःशुल्क उपलब्ध है। इसकी संकल्पना वैल्युएबल ग्रुप के प्रबंध निदेशक अमेय हेते की है।

‘संपूर्ण ज्ञानेश्वरी श्रवण’ मालिका का शुभारंभ


समारोह में सरसंघचालक जी ने श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों सहित ‘संपूर्ण ज्ञानेश्वरी श्रवण’ श्रृंखला यूट्यूब पर प्रसारित की। भागदौड़ भरी जिंदगी में जिनके लिए ज्ञानेश्वरी पढ़ना संभव नहीं हो पाता, उन्हें यह सहजता से सुनने को मिले — यही इसका मुख्य प्रयोजन है। ज्ञानेश्वरी का पठन रेणुका देशकर ने और श्रीमद्भगवद्गीता का पठन श्रीनिवास वर्णेकर ने किया है।

लोकार्पण से पहले संत ज्ञानेश्वर की रचनाओं पर आधारित संगीतमय कार्यक्रम हुआ, जिसमें गायक प्रथमेश लघाटे, मुग्धा वैशंपायन और केतकी चैतन्य ने पदों की प्रस्तुति दी। वरिष्ठ भाष्यकार डॉ. संजय उपाध्ये ने माऊली के साहित्य पर भाष्य प्रस्तुत किया तथा संचालन मिलिंद कुलकर्णी ने किया।


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *