
कृति सेनन का एक विज्ञापन जिसमें वे अत्यन्त भड़काऊ पोशाक में राखी मना रही है, की जम कर आलोचना हो रही है। होना भी चाहिए।
परन्तु थोड़ा सोचिए। जब एक विज्ञापन बनता है तो उस पर हफ्तों तक काम होता है। विज्ञापन एजेंसी एक विचार ले कर उत्पादक कंपनी से चर्चा करती है। उसे अपना कॉन्सेप्ट बताती है। उस कॉन्सेप्ट पर, उसके ग्राहक के प्रभाव पर, उस पर संभावित प्रतिक्रियाओं पर उसके नियमानुसार होने न होने पर लम्बी चर्चाएं होती है। उत्पादक कंपनी के शीर्ष अधिकारी, यदि कंपनी मध्यम आकार की हो तो उसके मालिक, उसके कर्ता धर्ता सभी उस पर विचार विनिमय करते हैं। फिर उचित मॉडल की चर्चा होती है। मॉडल को भी कॉन्सेप्ट समझाया जाता है। उनके भी सहयोगी स्टाफ होते हैं। सभी स्तरों पर चिन्तन, मंथन होने के बाद विज्ञापन शूट होता है और अन्ततः प्रसारित होता है।
जरा सोचिए, इस पूरी प्रक्रिया में किसी भी व्यक्ति को ऐसा नहीं लगा कि यह विज्ञापन समाज की भावनाओं को चोट पहुंचाएगा? और ऐसा भी नहीं कि इस प्रकार का यह पहला ही विज्ञापन है। पूर्व में भी दीपवाली, होली आदि त्योहारों को लेकर विवादास्पद विज्ञापन बने हैं और उन पर काफी शोर मचा है। फिर भी ऐसा विज्ञापन बनाया जाता है, इसे प्रसारित भी किया जाता है। यह संयोग नहीं हो सकता। यह असावधानी भी नहीं हो सकती। यह समझ का अभाव भी नहीं हो सकता। निश्चित तौर पर यह एक सोची समझी योजना है।
विज्ञापन का उद्देश्य क्या होता है? ग्राहक तक अपना नाम, अपना उत्पाद पहुंचाना। इसके लिए क्षमता अनुसार लाखों या करोड़ों रुपए खर्च किये जाते हैं। विज्ञापन का जितना अधिक प्रसार संभावित होगा उतना अधिक धन खर्च होगा यह सामान्य समीकरण है। परन्तु यदि आपका विज्ञापन ट्रोल का शिकार हो जाए तब बगैर किसी लागत के उसकी पहुँच कईं गुना बढ़ जाती है।
कल तक इस GIVA आभूषण ब्रांड का नाम कितने लोगों को पता था? आज यह कितने लोगों तक पहुंच चुका है? इस ब्रांड को रचनात्मक विज्ञापन के माध्यम से इतने लोगों तक पहुंचने में कितना धन और समय लगता? इस दृष्टिकोण से सोचेंगे तो ऐसे विज्ञापनों का तर्क समझ में आ जाएगा। यह विज्ञापन ‘गंदा है पर धन्धा है‘ कहने वालों की सोच का उदाहरण है। यह सोचा समझा प्रयोग है, संयोग नहीं। ये लोग जानते हैं कि कुछ दिन गालियाँ पड़ेंगी। और यह भी कि शीघ्र ही विज्ञापन पीछे रह जाएगा पर ग्राहक बढ़ते रहेंगे!
जब तक हिन्दू समाज इस प्रकार के प्रयासों को नुकसान नहीं पहुँचाता, तब तक ये घटिया हरकते चलती रहेंगी। कृति सेनन को ट्रोल करने से कुछ नहीं होगा। जितना ट्रोल करेंगे उतना उत्पादक को लाभ ही मिलेगा। होना तो यह चाहिए कि इस ब्रांड का सामाजिक बहिष्कार हो। यदि हानि होगी तो ज्ञान भी प्राप्त होगा। वरना चार दिन चिल्लपों चलेगी, अधिक से अधिक एक माफीनामा आ जायेगा, ग्राहकी बढ़ ही जाएगी और आगे भी ऐसे विज्ञापन, सफलता की गारंटी बन कर, प्रसारित होते रहेंगे।
श्रीरंग वासुदेव पेंढारकर