
नई दिल्ली।
अपने देश की स्वाधीनता के साथ ही देश का विभाजन भी जुड़ा हुआ है। देश का विभाजन हम सभी के लिए एक बहुत बड़ी त्रासदी है। विश्व के किसी देश की एकमात्र घटना होगी, जिसमें लाखों लोग मारे गए, और लगभग 1.5 करोड़ लोग विस्थापित हुए। इसलिए स्वाधीनता दिवस के अवसर पर विभाजन की त्रासदी का भी स्मरण करना आवश्यक है।
इसलिए देश विभाजन के इतिहास की तह तक जाना आवश्यक है, विशेषकर 1 अगस्त से 15 अगस्त 1947, इन 15 दिनों में क्या हुआ। हमारे देश का राजनीतिक नेतृत्व क्या कर रहा था। गांधी जी कहां थे, जवाहर लाल नेहरू क्या कर रहे थे। जिन्ना कितना समय भारत व कितना समय भावी पाकिस्तान में रहे, लॉर्ड माउंटबेटन क्या कर रहे थे। सरदार वल्लभभाई पटेल किनसे मिल रहे थे। इन 15 दिनों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की क्य़ा भूमिका थी, देश का जनमानस क्या कर व सोच रहा था?
इन सभी प्रश्नों के उत्तर व उन पंद्रह दिनों की कहानी — वे पंद्रह दिन लेखमाला में
वे पन्द्रह दिन…/ 01 अगस्त, 1947
वे पन्द्रह दिन…/ 02 अगस्त 1947
वे पंद्रह दिन…/ 03 अगस्त, 1947
वे पन्द्रह दिन…/ 04 अगस्त, 1947
वे पंद्रह दिन…/ 05 अगस्त, 1947
वे पंद्रह दिन…/ 06 अगस्त, 1947
वे पंद्रह दिन…/ 07 अगस्त, 1947
वे पंद्रह दिन…/ 08 अगस्त, 1947
वे पन्द्रह दिन…/ 09 अगस्त, 1947
वे पन्द्रह दिन…/ 10 अगस्त, 1947
वे पंद्रह दिन…/ 11 अगस्त, 1947
वे पंद्रह दिन…/ 12 अगस्त, 1947
वे पंद्रह दिन…/ 13 अगस्त, 1947
वे पंद्रह दिन…/ 14 अगस्त, 1947
वे पंद्रह दिन…/ 15 अगस्त, 1947
वे पन्द्रह दिन – समापन, 15 अगस्त के बाद….