मन चंगा तो कठौती में गंगा: आंतरिक शुद्धता ही समरस समाज का आधार

लेखक: श्री राजेश कुमरावत ‘सार्थक’ भारतीय संत परंपरा ने सदैव समाज को भीतर से जोड़ने और…