‘मनुस्मृति’ का एक श्लोक पढ़कर महिलाओं को ज्ञान देने निकले राहुल गांधी!

 (संकुचित राजनैतिक विमर्श बनाम शाश्वत सामाजिक सत्य) डॉ. मयंक चतुर्वेदी  वैचारिक शून्यता और तात्कालिक राजनैतिक लाभ…

वीडियो कॉल पर अंतिम विदाई और आभासी दुनिया का भ्रम : ‘कुटुम्ब प्रबोधन’ की चीखती अनिवार्यता

₹5,100 की ऑनलाइन रसीद, लाखों फॉलोअर्स की खामोशी और भारतीय परिवार व्यवस्था के सामने खड़ा सबसे…

राष्ट्रीय चेतना का उभार और बदलते सांस्कृतिक पाला– एक सशक्त सामाजिक रूपांतरण की दास्तान–कैलाश चन्द्र

देश का परिवेश—और उसके साथ दरवेश—इन दिनों अद्भुत रूपांतरण से गुजर रहा है। चारों ओर जो…