
डॉ पवन विजय की लेखनी से…
एक ही सिग्नेचर – हर देश में एक साथ आग, और हर आग का एक ही पैटर्न।
रूस को यूक्रेन में उलझा दो, ताकि यूरोप की एनर्जी टूट जाए। इजराइल को तीन साल से युद्ध में फंसा दो, ताकि मिडिल ईस्ट कभी स्थिर न हो। ईरान को परमाणु की दहलीज पर खड़ा कर दो, अमेरिका को ईरान से भिड़ा दो, हूतियों से सऊदी को जलाओ, ताकि तेल का एक भी रास्ता सुरक्षित न बचे। वेनेजुएला पर कब्जा, ताकि लैटिन अमेरिका में भी कोई आवाज न उठे।
फिर यूरोप के अंदर दूसरा मोर्चा खोलो। फ्रांस को घुसपैठियों से जला दो – तुमने खुद देखा, गुच्ची के बाहर आग, 143 साल का टाउन हॉल राख, दुकानदार लड़की गिड़गिड़ा रही है और लुटेरे हंस रहे हैं। स्पेन को उसी भीड़ से घेरो, इटली को उसी भीड़ से फूंक दो, मिलान में ड्यूमो के सामने पुलिस से युद्ध। ताकि यूरोप का आम आदमी अपनी ही गली में डर कर जिए।
फिर हमारे घर के चारों तरफ दीवार गिरा दो। नेपाल में तख्तापलट, श्रीलंका में तख्तापलट, बांग्लादेश में तख्तापलट, पाकिस्तान को तोड़ने की कगार पर ला दो। ताकि भारत के चारों तरफ सिर्फ आग हो, और भारत को लगे कि वो अकेला है।
और फिर भारत में वही आग लगाने की कोशिश, हर छह महीने में एक नया चेहरा। कभी लंगर, कभी तिरपाल, कभी माइक, कभी जंतर-मंतर। मुद्दा कभी किसान, कभी जवान, कभी पहलवान, कभी संविधान। पर स्क्रिप्ट एक ही – सड़क जाम करो, देश बंद करो, दुनिया को दिखाओ भारत जल रहा है।
कुछ भी अपने आप नहीं हो रहा। महंगाई अपने आप नहीं बढ़ी, घुसपैठ अपने आप नहीं हुई, यूनिवर्सिटी में नारे अपने आप नहीं लगे, टाउन हॉल में आग अपने आप नहीं लगी। ये सब मैनेज्ड है।
क्यों? क्योंकि दुनिया को रीसेट करना है।
पुरानी दुनिया में देश थे, बॉर्डर थे, सेना थी, परिवार था, धर्म था, बाजार था। नई दुनिया में ये सब रोड़ा है। नई व्यवस्था को चाहिए – बिना बॉर्डर की दुनिया, बिना परिवार का समाज, बिना धर्म की भीड़, बिना राष्ट्र का बाजार। जहां एक ही सॉफ्टवेयर सबको चलाए।
और उस सॉफ्टवेयर के इंस्टॉल होने में सबसे बड़ा बग कौन है?
भारत।
भारत इसलिए नहीं क्योंकि उसके पास परमाणु बम है, इसलिए क्योंकि उसके पास एक ऐसा नेतृत्व है जो इस सिग्नेचर को पहचानता है। जो जानता है कि फ्रांस की आग और शाहीन बाग की आग अलग नहीं, जो जानता है कि बांग्लादेश का तख्तापलट और भारत में जाति जनगणना का शोर अलग नहीं।
फ्रांस झुक गया, इसलिए जल गया। इटली घिर गई, इसलिए सुलग रही है। नेपाल, श्रीलंका, बांग्लादेश के पास कोई नहीं था जो भीड़ को चीर कर खड़ा हो सके, इसलिए टूट गए।
भारत के पास है।
इसीलिए भारत पर हमला सबसे ज्यादा है, और इसीलिए भारत अभी तक टूटा नहीं।
ये लड़ाई महंगाई की नहीं, व्यवस्था की है। और इस लड़ाई में पूरी दुनिया की नई व्यवस्था के रास्ते में अगर कोई एक आदमी सबसे बड़े पत्थर की तरह खड़ा है, तो वो तुम्हें पता है कौन है।