माओवादी नैरेटिव: वामपंथी दीमक की अंतिम चीख और भारतीय जनजाति समाज का वास्तविक सत्य

माओवादी नैरेटिव शासन को दमनकारी बताकर हिंसा को न्यायोचित ठहराता है। हिडमा जैसे आतंकियों का महिमामंडन वैचारिक धोखाधड़ी है। गरीबी नहीं, विचारधारात्मक प्रदूषण नक्सलवाद की जननी है।